जीएल बजाज के छात्र प्रबंधन की खूबियों से हुए रू-ब-रू        एमबीए के छात्र-छात्राओं का ओरिएंटेशन कार्यक्रम

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मथुरा। जनपद के प्रतिष्ठित इंजीनियरिंग और आर्किटेक्चर संस्थान जी.एल. बजाज के छात्र-छात्राएं एमबीए के ओरिएंटेशन कार्यक्रम में प्रबंधन क्षेत्र की खूबियों से हुए रू-ब-रू हुए। इस अवसर पर संस्थान के निदेशक एस.आर. चौधरी ने कहा कि हम छात्र-छात्राओं को अच्छे माहौल में बेहतर तालीम देने को प्रतिबद्ध हैं। संस्थान का प्रयास है कि यहां से छात्र-छात्राएं जब अध्ययन समाप्त करें तो उनके हाथ में सिर्फ डिग्री ही नहीं नौकरी भी हो।

इस अवसर पर एलुमिनाई छात्रा प्रेरणा आनंद और छात्र उज्ज्वल श्रीवास्तव ने नवागंतुक छात्र-छात्राओं को बताया कि जी.एल. बजाज संस्थान में हमें जो सैद्धांतिक और व्यावहारिक ज्ञान मिला उसी का नतीजा है कि हमें उच्च पैकेज पर नौकरी मिली। यहां कार्यशालाओं और शैक्षणिक भ्रमण के अवसरों से पढ़ाई-लिखाई में कभी बोरियत ही महसूस नहीं होती। ओरिएंटेशन कार्यक्रम में विभागाध्यक्ष जीतेन्द्र सिंह, डा. जीतेन्द्र सिकरवार, रितु सिंह, बिपिन रावत और पारस राठौर ने छात्र-छात्राओं को एच.आर., मार्केटिंग, फाइनेंस, इंटरनेशनल बिजनेस, इम्फार्मेशन टेक्नोलाजी, आपरेशंस मैनेजमेंट की महत्ता पर विस्तार से प्रकाश डाला।

विभागाध्यक्ष जीतेन्द्र सिंह ने बताया कि प्रबंधन का क्षेत्र बहुत विस्तृत है। प्रबंधन का सिद्धांत निर्णय लेने एवं व्यवहार के लिए व्यापक एवं सामान्य मार्गदर्शक होता है। प्रबंधन के सिद्धांतों को खालिस विज्ञान से भिन्न माना जा सकता है क्योंकि इनका संबंध मानवीय व्यवहार से है इसलिए इनको परिस्थिति की माँग के अनुसार उपयोग में लाया जा सकता है। व्यवसाय को प्रभावित करने वाले मानवीय व्यवहार एवं तकनीक कभी स्थिर नहीं होते, यह सदा बदलते रहते हैं। प्रबंधन के सिद्धांतों की समझ को विकसित करने के लिए यह जानना भी उपयोगी है कि यह सिद्धांत नया नहीं है। प्रबंधन के सिद्धांत एवं तकनीक में अंतर होता है। तकनीक का अभिप्राय प्रक्रिया एवं पद्धतियों से है। यह इच्छित उद्देश्यों की प्राप्ति के लिए विभिन्न चरणों की श्रृंखला होते हैं। सिद्धांत तकनीक निर्णय लेने अथवा कार्य करने में मार्गदर्शन का काम करती है। इसी प्रकार से सिद्धांतों को मूल्यों से भिन्न समझना चाहिए। मूल्यों से अभिप्राय किसी चीज को स्वीकार करने अथवा उसकी इच्छा रखने से है। मूल्य नैतिकतापूर्ण होते हैं। सिद्धांत व्यवहार के आधारभूत सत्य अथवा मार्गदर्शक होते हैं। प्रबंधन के सिद्धांतों को व्यवहार में लाते समय मूल्यों की अवहेलना नहीं कर सकते क्योंकि व्यवसाय को समाज के प्रति सामाजिक एवं नैतिक उत्तरदायित्वों को निभाना होता है।

आर.के. एजूकेशन हब के चेयरमैन डा. रामकिशोर अग्रवाल ने अपने संदेश में छात्र-छात्राओं से कहा कि प्रबंधन की शुरूआत घर से ही शुरू हो जाती है। अच्छी तालीम हासिल कर हम प्रबंधन के क्षेत्र में सिर्फ नौकरी ही नहीं अपना रोजगार भी स्थापित कर सकते हैं।

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तीन दिवसीय अन्त्योदय मेला एवं प्रदर्शनी 26 अगस्त से

मथुरा 25 अगस्त। पं0 दीनदयाल उपाध्याय जी के जन्मशताब्दी वर्ष आयोजन के अवसर पर उनके विचारों से जनसामान्य को अवगत कराये जाने, उनके सपनों को साकार करने की दिशा में प्रदेश सरकार द्वारा किये जा रहे कार्यों से जनसामान्य को परिचित कराने एवं इन प्रयासों में जनता की व्यापक भागीदारी सुनिश्चित कराने के उद्देश्य से तीन दिवसीय अन्त्योदय मेला एवं प्रदर्शनी का शुभारंभ विकास खण्ड कार्यालय परिसर फरह में 26 अगस्त को आयोजन किया जायेगा, जो कि 28 अगस्त तक रहेगा।

मुख्य विकास अधिकारी यशु रूस्तगी ने बताया कि तीन दिवसीय अन्त्योदय मेला एवं प्रदर्शनी मे सूचना विभाग द्वारा पं0 दीनदयाल उपाध्याय जी के जीवन चरित्र पर सचित्र प्रदर्शनी के अतिरिक्त चिकित्सा, कृषि, मत्स्य, डूडा, उद्यान, समाज कल्याण, बाल विकास, बेसिक शिक्षा, कौशल विकास मिशन, पंचायतीराज, पशु चिकित्सा, खादी ग्रामोद्योग, विकलांग कल्याण तथा उद्योग केन्द्र के द्वारा अपने विभागीय स्टॉल लगाकर जनसामान्य को योजनाओं की जानकारी दी जायेगी।

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