नगर निगम के 5.08 करोड़ के भुगतान पर रोक

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मथुरा: मथुरा-वृंदावन नगर निगम में 5.08 करोड़ के कामों का भुगतान जांच के बाद ही हो पाएगा। निगम के जलकल विभाग ने इस भारी-भरकम धनराशि के कार्य फर्जी तौर पर दर्शाए और भुगतान के बिल तैयार कर लिए, लेकिन इसकी शिकायत होने के बाद नगर आयुक्त ने भुगतान रोक दिया है। उनकी मानें तो तीन सदस्यीय कमेटी उक्त शिकायत की जांच करेगी और सभी कार्यों का स्थलीय परीक्षण भी कराया जाएगा।

पूर्व नगर पालिका बोर्ड की अंतिम बैठक में अधिकारियों ने 16 प्रस्ताव कार्य की आवश्यकता दर्शाते हुए एजेंडा में रखवाए, जो तत्कालीन बोर्ड ने स्वीकृत कर दिए। इन प्रस्तावों के सापेक्ष पिछले चार महीने में दिखावटी कार्य कराए गए। मसानी नाले की सफाई से लेकर यमुना पार और पीएमवी पालीटेक्निक के पीछे स्थित दो सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट की सफाई भी कागजों पर ही करा ली गयी। इसी तरह तमाम तरह की मशीनें और पाइप आदि की खरीद भी फर्जी तौर पर कर ली गयी।

सबमर्सिबल स्थापना, नलकूपों का कार्य और इंडिया मार्का हैंडपंपों की मरम्मत भी कागजों पर ही हुई। मामले की शिकायत पूर्व सभासद ठा. बिहारी लाल ने शासन और मंडलायुक्त को की है, इसकी जांच किसी भी दिन आ सकती है। इस बीच नगर आयुक्त डा. उज्जवल कुमार ने आरोपों को गंभीर प्रकृति का मानते हुए तीन सदस्यीय कमेटी से इनका स्थलीय सत्यापन कराने का निर्णय किया है। शिकायत कर्ता का कहना है कि आरोपी अधिकारियों के अलावा किसी कमेटी से जांच हुई तो गड़बड़ी सामने आ जाएगी।

जलकल विभाग ने उक्त कार्यों का भुगतान कराने के लिए इनके बिल तैयार कर लिए थे और पत्रावली नगर आयुक्त की स्वीकृति के लिए भेज दी गयी थी। इस बीच जागरण ने इस गड़बड़ी का राजफाश कर दिया। तभी से भुगतान रुके हुए हैं। उक्त कार्यों में दो-तीन चहेते ठेकेदारों के कार्यों में सबसे ज्यादा अनियमितताएं बताई जा रही हैं।

नगर आयुक्त डा. उज्जवल कुमार ने बताया है कि तीन सदस्यीय कमेटी इन कार्यों की जांच करेगी। स्थलीय परीक्षण भी कराया जाएगा। जांच के निष्कर्ष के बाद ही भुगतान पर कोई फैसला लिया जाएगा।

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