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एन एस एफ़ के साथ देशहित में कार्य करने का सुनहरा मौक़ा :- नागरिक सुरक्षा फोर्स (एन एस एफ़ ) आप समस्त नागरिकों से विनम्र निवेदन करता है कि देश और समाज की सुरक्षा हेतु

एन एस एफ़  के साथ देशहित में कार्य करने का सुनहरा मौक़ा :-
नागरिक सुरक्षा फोर्स  (एन एस एफ़ ) आप समस्त नागरिकों से विनम्र निवेदन करता है कि देश और समाज की सुरक्षा हेतु आप एक जिम्मेदार नागरिक की भूमिका अदा करें ।

एन एस एफ़  भारत के समस्त रिटायर्ड तथा ईमानदार न्यायाधीश / एडवोकेट / शिक्षक / सीबीआई अधिकारी/ पुलिस कर्मचारी /विजलेंस अधिकारी / पुलिस अधिकारी /कर्मचारी व अन्य विभागों से सेवा निर्वित ईमानदार अधिकारी /कर्मचारी / सम्पादक /मान्यता प्राप्त पत्रकार / लेखको व सम्मानित समाज सेवको तथा प्रतिष्ठित नागरिको अनुभवी नव युवक- युवती , पुरुष- महिलाओ से आव्हान करती है देश के लिए अच्छी नियत से निस्वार्थ कार्य करने हेतु इच्छुक संपर्क करें।
अपराध को खत्म करने में हमारी एवं कानून की सहायता करें ।

संपूर्ण भारत में एन .एस एफ़  के जाँबाज़ सिपाही बनने हेतु हमारे हेल्प्लायन नम्बर 09756000218 पर संपर्क करें या अपने नाम / उम्र / जिला प्रदेश का नाम / शिक्षा एवं मोबाइल नम्बर सम्बन्धित जानकारी हमें वहट्सप्प अथवा ई- मेल द्वारा भेजें ।

वहट्सप्प :- 09756000218
ईमेल :-  nagriksurakshaforceorg.@gmail.com
वेब्सायट : www.nsforce.org

आइए संकल्प ले ना अपराध करेंगे, ना अपराध होने देंगे।
।। जय हिंद – जय भारत ।।

 

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नगर निगम के 5.08 करोड़ के भुगतान पर रोक

मथुरा: मथुरा-वृंदावन नगर निगम में 5.08 करोड़ के कामों का भुगतान जांच के बाद ही हो पाएगा। निगम के जलकल विभाग ने इस भारी-भरकम धनराशि के कार्य फर्जी तौर पर दर्शाए और भुगतान के बिल तैयार कर लिए, लेकिन इसकी शिकायत होने के बाद नगर आयुक्त ने भुगतान रोक दिया है। उनकी मानें तो तीन सदस्यीय कमेटी उक्त शिकायत की जांच करेगी और सभी कार्यों का स्थलीय परीक्षण भी कराया जाएगा।

पूर्व नगर पालिका बोर्ड की अंतिम बैठक में अधिकारियों ने 16 प्रस्ताव कार्य की आवश्यकता दर्शाते हुए एजेंडा में रखवाए, जो तत्कालीन बोर्ड ने स्वीकृत कर दिए। इन प्रस्तावों के सापेक्ष पिछले चार महीने में दिखावटी कार्य कराए गए। मसानी नाले की सफाई से लेकर यमुना पार और पीएमवी पालीटेक्निक के पीछे स्थित दो सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट की सफाई भी कागजों पर ही करा ली गयी। इसी तरह तमाम तरह की मशीनें और पाइप आदि की खरीद भी फर्जी तौर पर कर ली गयी।

सबमर्सिबल स्थापना, नलकूपों का कार्य और इंडिया मार्का हैंडपंपों की मरम्मत भी कागजों पर ही हुई। मामले की शिकायत पूर्व सभासद ठा. बिहारी लाल ने शासन और मंडलायुक्त को की है, इसकी जांच किसी भी दिन आ सकती है। इस बीच नगर आयुक्त डा. उज्जवल कुमार ने आरोपों को गंभीर प्रकृति का मानते हुए तीन सदस्यीय कमेटी से इनका स्थलीय सत्यापन कराने का निर्णय किया है। शिकायत कर्ता का कहना है कि आरोपी अधिकारियों के अलावा किसी कमेटी से जांच हुई तो गड़बड़ी सामने आ जाएगी।

जलकल विभाग ने उक्त कार्यों का भुगतान कराने के लिए इनके बिल तैयार कर लिए थे और पत्रावली नगर आयुक्त की स्वीकृति के लिए भेज दी गयी थी। इस बीच जागरण ने इस गड़बड़ी का राजफाश कर दिया। तभी से भुगतान रुके हुए हैं। उक्त कार्यों में दो-तीन चहेते ठेकेदारों के कार्यों में सबसे ज्यादा अनियमितताएं बताई जा रही हैं।

नगर आयुक्त डा. उज्जवल कुमार ने बताया है कि तीन सदस्यीय कमेटी इन कार्यों की जांच करेगी। स्थलीय परीक्षण भी कराया जाएगा। जांच के निष्कर्ष के बाद ही भुगतान पर कोई फैसला लिया जाएगा।

आरएसएस की बैठक में आएंगे योगी, जेटली और शाह

मथुरा। राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ की समन्वय समिति की बैठक में भाजपा अध्यक्ष अमित शाह, यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और वित्त मंत्री अरुण जेटली भी पहुंचेंगे। केंद्र और प्रदेश के कई मंत्री भी एक से तीन सितंबर के बीच केशवधाम में रहेंगे। उधर, इस बैठक को देखते हुए पुलिस प्रशासन ने सुरक्षा के चौकस इंतजाम कर लिए हैं। बताया जा रहा है कि अमित शाह और अरुण जेटली एक सितंबर को पहुंच रहे हैं। इसी दिन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के भी आने की संभावना है। वृंदावन के केशवधाम में एक सितंबर से तीन सितंबर तक संघ की समन्वय समिति की बैठक होने जा रही है। इसमें संघ की राष्ट्रीय कार्यकारिणी और संघ के जुड़े संगठनों के शीर्ष पदाधिकारी पहुंचेंगे। करीब 200 लोगों के पहुंचने की संभावना है।  इस संबंध में संघ के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख डा. मनमोहन वैद्य ने केशवधाम में हुई प्रेस कांफ्रेंस में बताया कि एक सितंबर को होने वाली बैठक में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष और वित्त मंत्री अरुण जेटली मौजूद रहेंगे। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी आ रहे हैं। उन्होंने बताया कि बैठक में सभी पदाधिकारी देश के ताजा हालात और अर्थव्यवस्था से लेकर आंतरिक सुरक्षा तक पर अपनी राय रखेंगे।  एक सवाल के जवाब में मनमोहन वैद्य ने बताया कि स्वयंसेवक देश भर में हैं, समय-समय पर देश और समाज हित में अपनी राय देते रहते हैं। इन्हीं सब बिंदुओं पर समन्वय मीटिंग का आयोजन किया जा रहा है। संघ प्रमुख मोहन भागवत केशवधाम में पहुंच ही चुके हैं।

हजारों सहायक अध्यापकों की जाएगी नौकरी

मथुरा। डॉ. बीआर अंबेडकर यूनिवर्सिटी की वर्ष 2003-04 की बीएड की फजी डिग्री के सहारे सहायक अध्यापक बने हजारों लोगों की नौकरी पर अब तलवार लटक गई है। स्पेशल इंवेस्टिगेशन टीम (एसआईटी) ने इनकी डिग्री निरस्त करने की संस्तुति की है।

जैसे ही यह कार्रवाई होगी, वैसे ही बेसिक शिक्षा विभाग इनकी छुट्टी कर देगा। इसके लिए विभाग को लिखा जा चुका है। कार्रवाई के अगले चरण में इनके खिलाफ एफआईआर भी दर्ज कराई जाएगी। इन्हें जेल की हवा खानी पड़ सकती है। एसआईटी बीएड सत्र 2003-04 की जांच कर रही है। इसमें लगभग 4000 डिग्रियां फर्जी पाई जा चुकी हैं। यह भी पता चला है कि इन फर्जी डिग्रियों के सहारे लोगों ने सहायक अध्यापक की नौकरी पाई है। इनमें से ज्यादातर आगरा, अलीगढ़, कानपुर, झांसी मंडल में तैनात हैं।  विवि के रिकार्ड से एसआईटी ने दो लिस्ट तैयार कीं। एक उन अभ्यर्थियों की जिनका 2003-04 में बीएड में रजिस्ट्रेशन था। इनकी संख्या 8132 है। दूसरी लिस्ट चार्ज रूम से तैयार की गई। इसमें बीएड की डिग्री 11132 निकली हैं। दोनों का मिलान करने के बाद 4000 डिग्री फर्जी पाई गईं हैं।

विभाग ने भी की जांच

एसआईटी के उच्च पदस्थ सूत्रों ने बताया कि 4000 डिग्री के रोल नंबर बेसिक शिक्षा विभाग को दिए गए थे। पूछा गया था कि कितने अध्यापकों के पास ये डिग्रियां हैं।जांच टीम में शामिल एक अधिकारी ने बताया कि बेसिक शिक्षा विभाग के आला अफसरों ने कहा है कि सहायक अध्यापकों पर कार्रवाई तब तक नहीं की जा सकती है जब तक कि यूनिवर्सिटी से इनकी डिग्री फर्जी घोषित नहीं कर दी जाती है।

दूसरी बार दी है रिपोर्ट

बेसिक शिक्षा विभाग को पहले भी रिपोर्ट दी गई थी। तब एसआईटी से चूक हुई थी। असली और फर्जी मार्कशीट अलग-अलग नहीं की गई थी। विवि से कहा था कि 2003-04 के सत्र में गड़बड़झाला हुआ है, इसलिए पूरा सत्र शून्य घोषित किया जाए। इसी आधार पर बेसिक शिक्षा विभाग को कार्रवाई के लिए कहा था। अब साक्ष्य के साथ लिस्ट सौंपी है।

विदेश में भी कर रहे नौकरी

आगरा विवि की फर्जी डिग्री सिर्फ बीएड की नहीं है। पिछले साल खुलासा हुआ था कि कई लोग एमबीए और एमटेक की फर्जी डिग्री के सहारे विदेशों में नौकरी कर रहे हैं। ऐसी 18 मार्कशीट सत्यापन के लिए आई थीं। तब इसका खुलासा हुआ था। दिल्ली में तो दो डॉक्टरों के पास इसी विवि की एमबीबीएस की फर्जी डिग्री मिली थी।

भारतीय संविधान मे प्राप्त मौलिकधिकर अनुसार पुलिस से संरक्षण ।

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1- थाने पर जो भी पीडित व्यक्ति आए उसकी रिपोर्ट अवश्य लिखी जाएगी और उचित धाराओं के अन्तर्गत अपराध पंजीकृत किया जाएगा तथा प्रथम सुचना रिपोर्ट की कॉपी निःशुल्क उपलब्ध कराई जाएगी ।
2- थाने पर पकड़कर लाए गए व्यक्ति के साथ मारपीट अथवा अमानवीय व्यवहार नही किया जाएगा ।
3- गिरफ्तार किए गए व्यक्ति को गिरफ्तारी का कारण बताया जाएगा तथा अपनी रुचि के विधि व्यवसायी से परामर्श करने और प्रतिरक्षा के अधिकार से वंचित नही रखा जाएगा ।
4- यदि किसी व्यक्ति को थाने पर साक्ष्य हेतु बुलाया जाता हैं तो उसे उचित यात्रा व्यय दिया जाएगा ।
5- गिरफ्तार किए गए व्यक्ति को गिरफ्तारी के दौरान हल्की या गहरी चोट आने की स्थिति मे चिकित्सा परीक्षण कराया जाएगा मेमो तैयार किया जाएगा ।
6- थाने मे रोके गए ले जाते समय न्यायालय मे पेश करते समय अथवा एक कारागार से दूसरे कारागार मे स्थानान्तरण पर ले जाते समय हथकड़ी नही लगाई जाएगी जब तक की सम्बन्धीम न्यायालय से हथकड़ी लगाने का आदेश न प्राप्त कर लिया गया हो ।
7- गिरफ्तार व्यक्ति को 24 घंटे के अन्दर सक्षम न्यायालय मे पेश किया जाएगा ।
8- गिरफ्तार किए गए व्यक्ति को जब तक थाने मे रखा जाएगा उसे नियमानुसार भोजन की व्यवस्था कराई जाएगी ।
9- पुलिस रिमांड मे लिये गए व्यक्ति को प्रत्येक 24 घंटे मे चिकित्सा परीक्षण अवश्य कराया जाएगा ।
10- यदि किसी व्यक्ति ने ऐसा अपराध किया की मृत्यु हो जाती है तो उसकी सुचना तत्काल राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग को प्रोषित की जाएगी ।
11- यदि किसी व्यक्ति ने ऐसा अपराध किया हो जो ज़मानतीय हो तो थाने मे ही उसकी जमानत ( यदि कोई विशेष कराण न हो तो ) दे देनी चाहिये ।
12- गिरफ्तार व्यक्ति को अपने परिचित को स्थानीय टेलीफोन की सुविधा से अथवा लिखित द्वारा गिरफ्तारी की सुचना उसके घर पर दी जाएगी ।
13- यदि किसी अपराधी से कोई चीज़ या वस्तु की बरामदगी की जाती है तो उसको रसीद अवश्य दी जाएगी तथा कुर्क किए गए माल की उचित सुरक्षा भी की जाएगी ।
14- शारीरिक रुप से असछम व्यक्तियों के अधिकारों का संरक्षण किया जाएगा ।
15- श्रमिको की समस्याओं विशेषकर उनकी महिलाओ की संवेदनशीलता के साथ सुना जाए एवं उनका निस्तारण किया जाए ।
16- पुलिस कर्मियों द्वारा किसी व्यक्ति से पूछताछ करते समय अपनी वर्दी पर नेम प्लेट लगाना आवश्यक होगा ।
17- किसी महिला को थाने पर अकारण नही रोका जाएगा ।
18- थाने पर पूछताछ के दौरान आने वाली समस्त महिलाओ से अश्लील व अभ्रद भाषा का प्रयोग नही किया जाएगा और बलात्कार के साक्ष्य मे उच कोटि की संवेदन शीलता एवं सदभावना का परिचय दिया जाएगा और जहाँ तक सम्भव हो उसकी रिपोर्ट महिला पुलिस द्वारा ही लिखी जाएगी ।यदि ऐसा संभव न हो तो कम से कम महिला गार्ड की उपस्थिति अवश्य की जाएगी ।
19- बलात्कार से पीडित महिला का बयान उसके किसी नज़दीकी रिश्तेदार की उपस्थिति मे लिया जाए एवं उचित चिकित्सा परीक्षण के लिये ले जाते समय भी उसके किसी पुरष रिश्तेदार की उपस्थिति अवश्य की जाए यदि यहाँ सम्भव न हो तो महिला पुलिसकर्मी के साथ भेजा जाए ।

भाजपा इस खेल की सबसे माहिर खिलाड़ी है 

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मनोज सिरोही

विशेष रिपोर्ट

‘धर्म सत्ता के सहारे राज सत्ता’ का खेल फिर पड़ गया भारी

बेनकाब नहीं होता तो भविष्य का बड़ा मठाधीश संत होता  ‘रामवृक्ष’ यादव

-धर्म सत्ता से राज सत्ता पर काबिज होेने के उपक्रम की कड़ी था रामवृक्ष

-भाजपा इस खेल की सबसे माहिर खिलाड़ी है

मथुरा। संतों के सहारे सत्ता हासिल करने का खेल एक बार फिर भारी पड़ गया। कोर्ट की फटकार, खुफिया महकों की आशंकाओं और भारी संख्या में जुट रहे अनुयाईयों की हकीकत को दर किनार कर हरियाणा सरकार ने रामरहीम के  समर्थकों के प्रति वह सख्ती नहीं दिखाई जो बरती जानी चाहिए थी। इस नरमी का नतीजा भी वही रहा जो पिछल साल मथुरा में जवाहरबाग में देखने को मिला था। उत्तरांचल में जयगुरुदेव और रामवृक्ष के अनुयाई सपा को सत्ता हासिल करने में मददगार नजर आ रहे थे तो हरियाणा में भाजपा को रामरहीम के समर्थकों में यही संभावना दिख रही थी। हरियाणा में 17 विधान सभा सीट ऐसी हैं जहां रामरहीम का प्रभाव रहा है। इसी लालच में हरियाणा की खट्ट सरकार विपरीत हालातों से पिनटने के लिए किसी नतीजे पर पहुंचने में देर कर गई तो यूपी में अखिलेश सरकार को कोर्ट के आदेश के बाद भी एक्शन में आने में लम्बा वक्त लगा। सच का जाये तो अखिलेश सरकार एक्शन में नहीं आई और अधिकारियों को मजबूरी में आधी-अधूरी तैयारी के साथ कर्रवाई करनी पड़ी थी। पास उल्टा नहीं पड़ता और दो जांबाज अफसरों की जान नहीं जाती तो आला अधिकारियों पर गाज गिरना तय था। यही वहज रही कि जब तत्कालीन एसपी सिटी मुकुल द्विवेदी जवाहरबाग में घुसे डीएम और एसएसपी मौके पर नहीं थे।

खेर जो सोचा वह हुआ नहीं और जो नहीं सोचा था वह घटित हो गया, इस कांड की जांच सीबीआई कर रही है, जिसे कोर्ट से कई मर्तबा फटकार मिल चुकी है। सत्ता का आशीर्वाद फलीभूत हो जाता तो आज रामवृक्ष यादव भी पहुंचे हुए संतों की श्रेणी में होता। कहिए कि किस्मत ऐन मौके पर गच्चा दे गई, अन्यथा यही रामवृक्ष  जवाहरबाग में बैठ कर हजारों-लाखों लोगों को प्रभु प्राप्ति का रास्ता बता रहा होता और अपने लिए जवाहरबाग जैसी दूसरी जगहों को हड़पने के रास्ते खोल रहा होता। सरकार ही नहीं विपक्ष के भी बड़े-बड़े नेता आशीर्वाद लेने के लिए कतार में होते, आशीर्वाद में लेकर क्या जाते यह कोई कभी समझ नहीं पाता लेकिन  रामवृक्ष यादव की चरणरज पाने की ललक ऐसे होती कि कितने ही लोगों के लिए ‘रामवृक्ष नाम प्रभु का होता’  जवाहरबाग की करीब 280 एकड़ भूमि को 99 साल के पट्टे पर देने की पूरी तैयारी हो गई थी। यह बात भी अब छुपी नहीं रह गई है कि इतने बड़े आशीर्वाद के पीछे किसका हाथ था। बनते-बनते खेल बिगड़ गया और भविष्य के एक बड़े संत के चेहरे से नकाब उतर गया। हकीकत सामने आई तो लोग दंग रह गए। रामवृक्ष संत से राक्षस में तब्दील हो गया। किसी पहुंचे हुए  कथित मठाधीश संत को राक्षस में तब्दील होने की यह पहली कहानी नहीं है और आखिरी भी नहीं। संत का राक्षस रूप कब लोगों के सामने आजाये कोई नहीं जानता, बस नकाब उतरने की  बात है। आज रामवृक्ष जवाहरबाग का बवाली है। दर्जनों मौतों का जिम्मेदार है। इस समय देश के सबसे बड़े अपराधियों में से एक है। वह लोग भी रामवृक्ष यादव को अपराधी बता रहे हैं जिनके इशारे पर रामवृक्ष यादव इस स्थिति में पहुंचा कि सिस्टम को खुल कर चुनौती देने लगा। वक्त रामवृक्ष यादव के साथ नहीं था।  भारतीय उपमहाद्वीप से यूरोप तक धर्म और सत्ता का गहरा नाता रहा है। इतिहास में ऐसे अनेक उदाहरण देखने को मिल जाते हैं जब धर्म ही सत्ता का संचालन करता है। यह कई बार प्रतक्ष तो कई बार अप्रतक्ष रूप से होता है। धर्म सत्ता के जरिये राज सत्ता पर हावी होने के भी इतिहास में कई सटीक उदाहरण हैं और धर्म सत्ता को सीढ़ी बना कर राज सत्ता पर काबिज होने की प्रक्रिया को वर्तमान भारतीय राजनीति के जरिये बेहतरीन तरीके से समझा जा सकता है। धार्मिक भावनाओं के ज्वार-भाटा को नियंत्रित करने और इसे अपने पक्ष में इस्तैमाल करने के लिए राज सत्ता पर काबिज लोग हमेशां मठाधीशों को आश्रय देते हैं। कानूनी और गैरकानूनी तरीके से इन्हें लाभ पहुंचाते हैं। धर्म के जरिये एक बड़े समूह तक पहुंचना और उस समूह को वोट बैंक की तरह अपने पक्ष में इस्तैमाल करने की उपक्रम की ही जवाहरबाग एक कड़ी था। सब कुछ बेहद सतर्क और योजनाबद्ध तरीके से अंजाम दिया जा रहा था। कुछ किस्मत कुछ कानूनी अड़चन कहिए कि खेल बनते बनते बिगड़ गया। जो भारतीय जनता पार्टी आज जवाहरबाग कांड को लेकर आग बबूला है, उसी भाजपा सरकार ने खुद कितने ही लोगों को मठ, मंदिर और आश्रम बनाने के लिए हजारों ऐकड़ जमीन लीज पर नहीं दी है। भाजपा की बातों को अगर पूरी तरह सच भी मान लिया जाये कि रामवृक्ष को उत्तर प्रदेश सरकार में बैठे लोगों का समर्थन हासिल था तो इस पर कम से कम भाजपा को इतना हो हल्ला नहीं मचाना चाहिए। धर्म सत्ता का उपयोग कर राज सत्ता पाने का भाजपा से कठिन और सफल उपक्रम इस देश में आजादी के बाद किसी दूसरे समूह अथवा राजनीतिक दल ने नहीं किया है। इस उपक्रम से उपजे घातक परणतियों को भोगा सभी ने है लेकिन भाजपा को कोसा किसी ने नहीं है। वर्तमान में भी भाजपा इसी उपक्रम को दोहराने की तैयारी में है। अभी तक यह तय नहीं कर पाई है कि यूपी की राज सत्ता को हासिल करने के लिए वह अपने दम और विकास कार्यों के सहारे आगे बढ़े कि एक बार फिर धर्म सत्ता को सीधी बना कर राज सत्ता पर काबिज होने के अपने पुराने फार्मूले पर ही काम करे और हर बार जब भी भाजपा संकट में होती है तो धर्म की आड़ लेती है लोगों की भावनाओं को भड़काती है, वोट मांगती है, उन्मांद पैदा करती है, समाज के तानेबाने को तारतार कर देती है, यूपी का हर चुनाव सामाजिक संरचना और भाईचारे के धागों को और कमजोर कर जाता है। अगर लखनऊ में बैठे सत्तशीन लोगों ने रामवृक्ष यादव के सहारे लाखों लोगों को साधने और उनको अपने वोट बैंक के रूप में स्तैमाल करने की जुगत भिड़ाई तो यह कोई नया प्रयोग नहीं था। बस बात इतनी सी है कि यह प्रयोग फेल हो गया।

 जीएल बजाज के छात्र प्रबंधन की खूबियों से हुए रू-ब-रू        एमबीए के छात्र-छात्राओं का ओरिएंटेशन कार्यक्रम

मथुरा। जनपद के प्रतिष्ठित इंजीनियरिंग और आर्किटेक्चर संस्थान जी.एल. बजाज के छात्र-छात्राएं एमबीए के ओरिएंटेशन कार्यक्रम में प्रबंधन क्षेत्र की खूबियों से हुए रू-ब-रू हुए। इस अवसर पर संस्थान के निदेशक एस.आर. चौधरी ने कहा कि हम छात्र-छात्राओं को अच्छे माहौल में बेहतर तालीम देने को प्रतिबद्ध हैं। संस्थान का प्रयास है कि यहां से छात्र-छात्राएं जब अध्ययन समाप्त करें तो उनके हाथ में सिर्फ डिग्री ही नहीं नौकरी भी हो।

इस अवसर पर एलुमिनाई छात्रा प्रेरणा आनंद और छात्र उज्ज्वल श्रीवास्तव ने नवागंतुक छात्र-छात्राओं को बताया कि जी.एल. बजाज संस्थान में हमें जो सैद्धांतिक और व्यावहारिक ज्ञान मिला उसी का नतीजा है कि हमें उच्च पैकेज पर नौकरी मिली। यहां कार्यशालाओं और शैक्षणिक भ्रमण के अवसरों से पढ़ाई-लिखाई में कभी बोरियत ही महसूस नहीं होती। ओरिएंटेशन कार्यक्रम में विभागाध्यक्ष जीतेन्द्र सिंह, डा. जीतेन्द्र सिकरवार, रितु सिंह, बिपिन रावत और पारस राठौर ने छात्र-छात्राओं को एच.आर., मार्केटिंग, फाइनेंस, इंटरनेशनल बिजनेस, इम्फार्मेशन टेक्नोलाजी, आपरेशंस मैनेजमेंट की महत्ता पर विस्तार से प्रकाश डाला।

विभागाध्यक्ष जीतेन्द्र सिंह ने बताया कि प्रबंधन का क्षेत्र बहुत विस्तृत है। प्रबंधन का सिद्धांत निर्णय लेने एवं व्यवहार के लिए व्यापक एवं सामान्य मार्गदर्शक होता है। प्रबंधन के सिद्धांतों को खालिस विज्ञान से भिन्न माना जा सकता है क्योंकि इनका संबंध मानवीय व्यवहार से है इसलिए इनको परिस्थिति की माँग के अनुसार उपयोग में लाया जा सकता है। व्यवसाय को प्रभावित करने वाले मानवीय व्यवहार एवं तकनीक कभी स्थिर नहीं होते, यह सदा बदलते रहते हैं। प्रबंधन के सिद्धांतों की समझ को विकसित करने के लिए यह जानना भी उपयोगी है कि यह सिद्धांत नया नहीं है। प्रबंधन के सिद्धांत एवं तकनीक में अंतर होता है। तकनीक का अभिप्राय प्रक्रिया एवं पद्धतियों से है। यह इच्छित उद्देश्यों की प्राप्ति के लिए विभिन्न चरणों की श्रृंखला होते हैं। सिद्धांत तकनीक निर्णय लेने अथवा कार्य करने में मार्गदर्शन का काम करती है। इसी प्रकार से सिद्धांतों को मूल्यों से भिन्न समझना चाहिए। मूल्यों से अभिप्राय किसी चीज को स्वीकार करने अथवा उसकी इच्छा रखने से है। मूल्य नैतिकतापूर्ण होते हैं। सिद्धांत व्यवहार के आधारभूत सत्य अथवा मार्गदर्शक होते हैं। प्रबंधन के सिद्धांतों को व्यवहार में लाते समय मूल्यों की अवहेलना नहीं कर सकते क्योंकि व्यवसाय को समाज के प्रति सामाजिक एवं नैतिक उत्तरदायित्वों को निभाना होता है।

आर.के. एजूकेशन हब के चेयरमैन डा. रामकिशोर अग्रवाल ने अपने संदेश में छात्र-छात्राओं से कहा कि प्रबंधन की शुरूआत घर से ही शुरू हो जाती है। अच्छी तालीम हासिल कर हम प्रबंधन के क्षेत्र में सिर्फ नौकरी ही नहीं अपना रोजगार भी स्थापित कर सकते हैं।

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तीन दिवसीय अन्त्योदय मेला एवं प्रदर्शनी 26 अगस्त से

मथुरा 25 अगस्त। पं0 दीनदयाल उपाध्याय जी के जन्मशताब्दी वर्ष आयोजन के अवसर पर उनके विचारों से जनसामान्य को अवगत कराये जाने, उनके सपनों को साकार करने की दिशा में प्रदेश सरकार द्वारा किये जा रहे कार्यों से जनसामान्य को परिचित कराने एवं इन प्रयासों में जनता की व्यापक भागीदारी सुनिश्चित कराने के उद्देश्य से तीन दिवसीय अन्त्योदय मेला एवं प्रदर्शनी का शुभारंभ विकास खण्ड कार्यालय परिसर फरह में 26 अगस्त को आयोजन किया जायेगा, जो कि 28 अगस्त तक रहेगा।

मुख्य विकास अधिकारी यशु रूस्तगी ने बताया कि तीन दिवसीय अन्त्योदय मेला एवं प्रदर्शनी मे सूचना विभाग द्वारा पं0 दीनदयाल उपाध्याय जी के जीवन चरित्र पर सचित्र प्रदर्शनी के अतिरिक्त चिकित्सा, कृषि, मत्स्य, डूडा, उद्यान, समाज कल्याण, बाल विकास, बेसिक शिक्षा, कौशल विकास मिशन, पंचायतीराज, पशु चिकित्सा, खादी ग्रामोद्योग, विकलांग कल्याण तथा उद्योग केन्द्र के द्वारा अपने विभागीय स्टॉल लगाकर जनसामान्य को योजनाओं की जानकारी दी जायेगी।

जेनरिक दवाओं से मिल रही मरीजों को राहत -प्रधानमंत्री भारतीय जन औषधि केंद्रों की खोली जा रही श्रंखला

मथुरा। भारत सरकार की प्रधामनंत्री जन औषधि परियोजना के तहत मैडिकल स्टोर की ऐसी श्रंखला खोली जा रही है जिससे मरीजों को 60 से 70 प्रतिशत कम कीमत पर मरीजों को दवाएं मिल सकेंगी। मथुरा में अभी तक इस श्रंखला के तहत 8 मैडिकल स्टोर खोले जा चुके हैं। प्रयास किया जा रहा है कि चिकित्सक भी इन जैनरिक दवाओं को लिखें और मरीज स्टोर तक पहुंच कर खरीदें। जिला औषधि निरीक्षक दीपक कुमार ने बताया कि योजना का प्रचार प्रसार किया जा रहा है, प्रयास किये जा रहे हैं कि देहात क्षेत्र में भी इस श्रंखला का विस्तार किया जाये। उन्होंने जैनरिक दवाओं को लेकर लोगों के बीच फैलाई जा रहीं भ्रांतियों और अफवाहों पर ध्यान नहीं देने की अपील करते हुए लोगों को सस्ती दवा लेने और चिकित्साकों को जैनरिक दवा लिखने के लिए भी कहा है। योजना के तहत मेडिकल खोलने वाले रोहित अत्री ने बताया कि लोगों में जागरुकता बढ़ रही है, प्रचार प्रसार होने पर भ्रांतियों का समाधान हो जाएगा। मरीजों पर दवाओं का खर्च आधे से भी कम होगा।

दूसरे दिन भी प्रभावित रहा रेल यातायात -बड़ी संख्या में ट्रेनें रहीं रद्द, कुछ को मथुरा जंक्शन पर ही रोका

गंतव्य तक पहुंचने को परेशान रहे यात्री

मथुरा। साध्वी रेप केस में गुरमीत राम रहीम को दोषी करार दिए जाने के बाद दूसरे दिन भी रेल संचालन प्रभावित रहा। मथुरा जंक्शन पर यात्री अपने गंतव्य तक पहुंचने के लिए परेशान रहे। दूसरे दिन अप और डाउन रूट की आधा दर्जन से अधिक ट्रेन रद्द रहीं। तूफान मेल, छत्तीसगढ़ एक्सप्रेस रद्द कर दी गर्इं, इंदौर अमृतसर और सचखण्ड एक्सप्रेस मथुरा से आगे नहीं बढ़ सकीं, 18238, 12138, 11078, 19710, 13008, 12904 नम्बर की ट्रेन भी रद्द रहीं। यात्रियों को किसी तरह दिल्ली तक पहुंचाने के प्रबंध में रेलवे प्रशासन जुटा रहा। ट्रेनों के रद्द होने और कुछ के मथुरा से आगे नहीं बढ़ने के कारण यात्री अपने गंतव्य तक पहुंचने को लेकर चिंतित रहे। जिन लोगों ने पहले ही रिजर्वेशन करा लिया था वह भी परेशान रहे। मथुरा जंक्शन स्टेशन निदेशक एनके सिंह ने बताया कि  यहां से अन्य गाड़ियों में यात्रियों को दिल्ली तक रवाना किया जा रहा है, हालात पर नजर रखी जा रही है। उसी के मुताबिक यात्रियों को दिशा निर्देश जारी किये जा रहा हैं। कोशिश की जा रही है कि यात्रियों को किसी तरह दिल्ली तक पहुंचाया जाए।

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