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भारतीय संविधान के मूल मे मानवाधिकार व उसका गठन

भारत मे राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग का गठन सन 1993 मे किया गया था तथा 08 जनवरी 1994 मे संसद मे एक अधिनियम द्वारा स्वीकृति प्रदान की गयी हें कोई भी व्यक्ति चाहे वह किसी भी राष्ट्र का नागरिक हो उसको अधिकार होगा की वह मानवधिकारों के हनन के विरुद्ध अपील / शिकायत कर सकता हें भारतीय संविधान मे निम्न मौलिक अधिकार प्रदान किये गए है ।
1- विधि के समक्ष समता का अधिकार ।
2- धर्म मूल ,वंश ,जाति ,लिंग ,स्थान के आधार पर विभेद का अन्त ।
3- वाक्र स्वतन्त्रता का अधिकार ।
4- मानव के बलात श्रम का प्रतिरोध व बाल श्रम का प्रतिरोध का अधिकार ।
5- प्राण एवं दैहिक स्वंत्रतता का अधिकार ।
6- धार्मिक स्वंत्रतता का अधिकार।
7- सम्पति का अधिकार ।
8- सवेधनिक ऊपचारो का अधिकार ।
भारतीय संविधान मे प्राप्त मौलिकधिकर अनुसार पुलिस से संरक्षण ।

1- थाने पर जो भी पीडित व्यक्ति आए उसकी रिपोर्ट अवश्य लिखी जाएगी और उचित धाराओं के अन्तर्गत अपराध पंजीकृत किया जाएगा तथा प्रथम सुचना रिपोर्ट की कॉपी निःशुल्क उपलब्ध कराई जाएगी ।
2- थाने पर पकड़कर लाए गए व्यक्ति के साथ मारपीट अथवा अमानवीय व्यवहार नही किया जाएगा ।
3- गिरफ्तार किए गए व्यक्ति को गिरफ्तारी का कारण बताया जाएगा तथा अपनी रुचि के विधि व्यवसायी से परामर्श करने और प्रतिरक्षा के अधिकार से वंचित नही रखा जाएगा ।
4- यदि किसी व्यक्ति को थाने पर साक्ष्य हेतु बुलाया जाता हैं तो उसे उचित यात्रा व्यय दिया जाएगा ।
5- गिरफ्तार किए गए व्यक्ति को गिरफ्तारी के दौरान हल्की या गहरी चोट आने की स्थिति मे चिकित्सा परीक्षण कराया जाएगा मेमो तैयार किया जाएगा ।
6- थाने मे रोके गए ले जाते समय न्यायालय मे पेश करते समय अथवा एक कारागार से दूसरे कारागार मे स्थानान्तरण पर ले जाते समय हथकड़ी नही लगाई जाएगी जब तक की सम्बन्धीम न्यायालय से हथकड़ी लगाने का आदेश न प्राप्त कर लिया गया हो ।
7- गिरफ्तार व्यक्ति को 24 घंटे के अन्दर सक्षम न्यायालय मे पेश किया जाएगा ।
8- गिरफ्तार किए गए व्यक्ति को जब तक थाने मे रखा जाएगा उसे नियमानुसार भोजन की व्यवस्था कराई जाएगी ।
9- पुलिस रिमांड मे लिये गए व्यक्ति को प्रत्येक 24 घंटे मे चिकित्सा परीक्षण अवश्य कराया जाएगा ।
10- यदि किसी व्यक्ति ने ऐसा अपराध किया की मृत्यु हो जाती है तो उसकी सुचना तत्काल राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग को प्रोषित की जाएगी ।
11- यदि किसी व्यक्ति ने ऐसा अपराध किया हो जो ज़मानतीय हो तो थाने मे ही उसकी जमानत ( यदि कोई विशेष कराण न हो तो ) दे देनी चाहिये ।
12- गिरफ्तार व्यक्ति को अपने परिचित को स्थानीय टेलीफोन की सुविधा से अथवा लिखित द्वारा गिरफ्तारी की सुचना उसके घर पर दी जाएगी ।
13- यदि किसी अपराधी से कोई चीज़ या वस्तु की बरामदगी की जाती है तो उसको रसीद अवश्य दी जाएगी तथा कुर्क किए गए माल की उचित सुरक्षा भी की जाएगी ।
14- शारीरिक रुप से असछम व्यक्तियों के अधिकारों का संरक्षण किया जाएगा ।
15- श्रमिको की समस्याओं विशेषकर उनकी महिलाओ की संवेदनशीलता के साथ सुना जाए एवं उनका निस्तारण किया जाए ।
16- पुलिस कर्मियों द्वारा किसी व्यक्ति से पूछताछ करते समय अपनी वर्दी पर नेम प्लेट लगाना आवश्यक होगा ।
17- किसी महिला को थाने पर अकारण नही रोका जाएगा ।
18- थाने पर पूछताछ के दौरान आने वाली समस्त महिलाओ से अश्लील व अभ्रद भाषा का प्रयोग नही किया जाएगा और बलात्कार के साक्ष्य मे उच कोटि की संवेदन शीलता एवं सदभावना का परिचय दिया जाएगा और जहाँ तक सम्भव हो उसकी रिपोर्ट महिला पुलिस द्वारा ही लिखी जाएगी ।यदि ऐसा संभव न हो तो कम से कम महिला गार्ड की उपस्थिति अवश्य की जाएगी ।
19- बलात्कार से पीडित महिला का बयान उसके किसी नज़दीकी रिश्तेदार की उपस्थिति मे लिया जाए एवं उचित चिकित्सा परीक्षण के लिये ले जाते समय भी उसके किसी पुरष रिश्तेदार की उपस्थिति अवश्य की जाए यदि यहाँ सम्भव न हो तो महिला पुलिसकर्मी के साथ भेजा जाए ।

नागरिक सुरक्षा फोर्स

नोट
1- भारतीय समाज मे गरीब ,असहाय ,अशिक्षित तथा शाशन – प्रशासन व परिवार से पीडित व्यक्तियों की मदद करे ।
2-आप अपनी शिकायत ट्रस्ट के अपने नज़दीक किसी भी पदाधिकरी व सदस्य को लिखित मे दर्ज करा सकते हैं  अन्यथा आप हमारे केंद्रीय कार्यालय मथुरा को भेज सकते हें ।
3- ट्रस्ट आपकी सेवा मे शिकायत का निस्तारण निःशुल्क व निस्वार्थ करता आ रहा हें ।

भारतीय संविधान के मूल मे मानवाधिकार व उसका गठन

भारत मे राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग का गठन सन 1993 मे किया गया था तथा 08 जनवरी 1994 मे संसद मे एक अधिनियम द्वारा स्वीकृति प्रदान की गयी हें कोई भी व्यक्ति चाहे वह किसी भी राष्ट्र का नागरिक हो उसको अधिकार होगा की वह मानवधिकारों के हनन के विरुद्ध अपील / शिकायत कर सकता हें भारतीय संविधान मे निम्न मौलिक अधिकार प्रदान किये गए है ।
1- विधि के समक्ष समता का अधिकार ।
2- धर्म मूल ,वंश ,जाति ,लिंग ,स्थान के आधार पर विभेद का अन्त ।
3- वाक्र स्वतन्त्रता का अधिकार ।
4- मानव के बलात श्रम का प्रतिरोध व बाल श्रम का प्रतिरोध का अधिकार ।
5- प्राण एवं दैहिक स्वंत्रतता का अधिकार ।
6- धार्मिक स्वंत्रतता का अधिकार।
7- सम्पति का अधिकार ।
8- सवेधनिक ऊपचारो का अधिकार ।

ब्रेकिंग न्यूज: गोवर्धन एसडीएम को सेवायत पुजारी ने मारा थप्पड़

फोटो-01-कलक्ट्रेट पहुंचे लिव इन रिलेशन में रह रहे पिता के बेसहारा हुए बच्चे।

मोदी से गुहार हिन्दू महिलाओं की भी सुनो सरकार

-तीन तलाक ही नहीं लिव इन रिलेशन से भी तबाह हो रही महिलाओं की जिंदगी

-लिव इन रिलेशन ने तबाह कर दिया परिवार

-पीड़ित महिला ने तीनों बच्चों के साथ दी आत्म हत्या की धमकी

मथुÞरा। मुस्लिम महिलाओं को तो तीन तलाक से मुक्ति मिल गई लेकिन हिन्दू महिलाओं को अभी लिव इन रिलेशन के दंश से मुक्ति का अभी इंतजार है। हालांकि यह नई प्रथा है और लोगों को अभी इस की ठीक से समझ भी नहीं है, लेकिन इसके दुष्परिणाम सामने आने लगे हैं। बिना कानूनी वैधता और नाम के महिला-पुरुष का पति पत्नी के साथ रहना  समाज के साथ ही पीड़ित महिलाओं को बेहद खल रहा है।

तीन तलाक के होहल्ला के बीच मथुरा के बल्देव में एक ऐसा मामला सामने आया है जिसमें लिव इन रिलेशन ने पूरा परिवार तबाह कर दिया। रिटायर्ड फौजी ने पहली पत्नी को तलाक देकर दूसरी शादी करने की बजाय पहली पत्नी को छोड़ कर दूसरी महिला के साथ लिव इन रिलेशन में रहना शुरू कर दिया। मामला बढ़ा तो दो बेटों और एक बेटी के साथ पत्नी को टाउनशिप स्थित राधाकृष्ण धाम एक्सटेंशन में किराये के मकान में लाकर छोड़ दिया। इसके बाद परिवार को ओर मुड़ कर नहीं देखा। किराया नहीं मिलने से मकान मालिक घर से निकालने और फीस नहीं जमा होने पर प्रबंधन बच्चों को स्कूल से निकालने की धमकी दे रहा है। पीड़ित महिला तीन बच्चों के साथ मंगलवार को कलक्ट्रेट पहुंची और डीएम की अनुपस्थिति में एडीएम रविंद्र कुमार को ज्ञापन सौंपा, ज्ञापन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से न्याय की गुहार लगाई है। पीड़ित महिला बाला देवी ने बताया कि जुलाई महीने से पति ने एक पैसा तक नहीं दिया है। तीन महीने से बच्चों की फीस जमा नहीं हुई है। प्रशासन ने भी नहीं सुनी तो मजबूर होकर उसे तीनों बच्चों के साथ आत्महत्या करनी पड़ेगी।

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